
Random Musings: Speak less than you know, always
One who is courteous and cultured deliberately attempts to be civil and polite under all circumstances, come what may. One who is sophisticated and refined also chooses to follow the etiquette and adopts the righteous way of conduct with others even in the most trying times. Our civility, courtesy and cultured approach towards others make…



Interview of the Week: Actor Naseeruddin Shah
“हजार मिटाने की कोशिश करें लेकिन मेरे ख्याल से उर्दू सलामत रहेगी।”नसीरूद्दीन शाह

आवारा ख़यालात
“चा चा चा” फ़िल्म में मख़्दूम मोहीउद्दीन की नज़्म “चारागर” को कुछ इस तरह गाया गाया था कि उसके मतलब बड़े ही आमियाना से लगते थे. “एक चमेली के मंडवे तले…” एक नज़्म और उसकी यादें 1968 में हम ने एस एस सी का इम्तिहान पास किया. तब एस एस सी, ग्यरहवीं जमात हुआ करती…

A walk down the memory lane…
Reminiscing the good old days of advertising with Dr Prakash Hindustani
What’s in a name?
छोटे-छोटे काम वाले लोग ऐसा कर सकते हैं। कोई बड़ी कंपनी ऐसा रिस्क नहीं ले सकती है। जिसका करोड़ो का बिजनेस है वह ऐसा काम नहीं करेगा। कोई बड़ी कंपनी कहे कि हम सबसे खराब नमक दे रहे हैं, खाकर तो देखें तो कोई खरीदेगा ? यह छोटे शहरों और छोटी जगहों पर चल सकता…


कालिया
सेलफोन के ईजाद से बहुत साल पहले, एक काले रोटरी-डायल टेलीफोन के जादुई शक्ति ने मेरे बचपन और अस्सी के दशक में जन्में अन्य बच्चों की कल्पनाओं को ऊँची उड़ान दी थी।देवाशीष मखीजा, लेखक और फिल्म निर्देशक कोरोमंडल एक्सप्रेस में हमारे डिब्बे को अलग कर बैंगलोर मेल में लगाया जा रहा था। हमारे डिब्बे को…
Street hawker Kallu Kewat songs reflect people’s poet Nazeer Akbarabadi’s style
नज़ीर अकबराबादी दुनिया के पहले एडवरटाइजिंग जिंगल राइटर थे।उन्होंने लगभग हर चीज़ पर नज़्म लिखी है। नज़ीर ऐसे जनकवि थे जिन्हें आप कुछ भी दे दीजिये, वो उसको बेचने के लिए आम जन की जुबान में नज़्म लिख डालते थे।रंगकर्मी, शायर और लेखक हबीब तनवीर ने अपने सबसे यादगार कृति ‘आगरा बाज़ार’ में शायर नज़ीर…
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